Kislay Komal's Blog

किसी का ख्याल..

किसी का ख्याल भी इस दिल में न आने पाए
आये जो भी आये, जज्बात कोई न आने पाए

मेरी ख्वाईशें तो कुचल दीं, खुद मेरी वफ़ा ने
कम-अज़-कम इन आँखों से, वो न जाने पाए

रास्ते तक-तक, सो गयी अब ये रात भी देखो
मुझे तन्हा देख वो चाँद, मगर न जाने पाए

कुछ बातें थीं, जो उसने कही और हमने सुनी
और कुछ ऐसी भी, जो उन लबों पे न आने पाए

तन्हाई जाती नहीं, किसी के भी साथ हो जाने से
जिन्दगी ही क्या, जो संग अपनों के, न बिताने पाए

उसे छोड़ पाना जो हमसे न हो पाया कभी
रुख़सत हुए हर बार, मगर दूर न जाने पाए

बदकिस्मती को दगा देने की जुर्रत भी की बेशक़
हम मिटते गए, परदे उन नज़रों से न उठाने पाए

हालात् मेरे बिगडे थे कुछ इस क़दर यारों
अपनी बेगुनाही पे उन्हें यकीं न दिलाने पाए

गर्मी-ए-हसरत-ए-नाकाम से जल गया जिस्म मेरा
शब्-ए-हिज्र इन आँखों से दो बूँद भी न गिराने पाए

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