Kislay Komal's Blog

उपवास की ताकत

बहुत सालों पहले जब मैं एक छोटा सा बच्चा हुआ करता था, लोगों को और अपने घर के कुछ सदस्यों को पर्व त्योहारों पर उपवास करते देखता था तो मुझे समझ नहीं आता था कि आखिर ये ऐसा क्यूँ करते हैं? खुद के स्वास्थय के लिए, देश के भूखे लोगों को खाना मिल सके इसलिए या फिर इसलिए कि भगवान् खुश होकर मन की मुरादें पूरी करेंगे| इसका जवाब मुझे उस वक़्त नहीं मिला और न ही मैं इतनी सारी जटिलताएं समझने का सामर्थ्य ही रखता था मगर सबके साथ मैंने भी जन्माष्टमी के दिन उपवास रखना शुरू कर दिया था और वो दिन अब भी मेरे दिमाग में बिलकुल तरो ताजा हैं | दिन भर के उपवास से मन की शुद्धि होती थी और उसके बाद भगवान् की पूजा| दिल से कुछ माँगना चाहे खुद के लिए चाहे औरों के लिए, एक मौका होता था जब सारी चिंताएँ भूलकर दिल को टटोलते थे कि हम में क्या क्या बुराईयाँ हैं और हम उसे कैसे दूर कर सकते हैं| सच्चे दिल से की गयी प्रार्थना कभी न कभी जरूर पूरी होती है| आज जिन्दगी के इस देहलीज पर आकर जब उन दिनों की तरफ घूम कर एक निगाह डालता हूँ तो लगता है मुझे मेरा जवाब मिल गया. २२ अगस्त २००९,तीज का पर्व, विवाहित स्त्रियों के लिए बहुत ही पावन दिन होता है| इस दिन वो अपने पति की लम्बी उम्र के लिए उपवास रखती हैं और अन्न जल बिलकुल ग्रहण नहीं करतीं| मैं न तो औरत हूँ न ही शादीशुदा मगर बरसों बाद आज फिर से मैंने उपवास रखा और मैंने आज फिर से अपने दिल को टटोला मैंने| आज फिर मैंने भगवान् से सच्चे दिल से कुछ माँगा| शादी एक रिवाज है रिश्ते को समाज में एक नाम देने का, मगर दिल से जुड़े रिश्तों का कोई नाम नहीं होता उसे मैं भगवान् का नाम देता हूँ| मैंने आज अपने उसी दिल से किसी के लिए उपवास रखा जिस से मेरा रिश्ता भगवान् ने दिल का बनाकर भेजा है| भगवान् से उसकी लम्बी उम्र और जीवन में सफलता की प्रार्थना की. मुझे पूरा भरोसा है भगवान् मेरी प्रार्थना जरूर सुनेंगे. उपवास की ताकत का अंदाजा मुझे हो गया है और ये भी अनुभव हुआ कि वो हमेशा मेरे इर्द गिर्द ही कहीं है और मैं अकेला नहीं. आज नहीं तो कल मेरी आँखें भी दिल की इस बात का यकीन करेंगी.

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