Kislay Komal's Blog

न जा तू कि जाती है मेरी जां तेरे जाने से

गिर-गिर संभलती है मेरी जां तेरे जाने से
न जा तू कि जाती है मेरी जां तेरे जाने से

हमसे हुई खता खड़े हम गुनहगार बनकर
सज़ा जो भी मिले, है आसां, तेरे जाने से

रखते थे उदासियाँ जो चेहरों पे कल तलक
हँस रहे मेरे रकीब सुब्ह-शाम तेरे जाने से

इक आरजू दबी थी बरसों से जो दिल में
धुआं बनकर हो गयी तमाम तेरे जाने से

किस्से जो चल रहे थे सरगोशियों के बूते
हरसू हो गए चर्चा-ए-आम तेरे जाने से

न रहा यकीं मुझे खुद अपनी जबान का
यूँ जबां मेरी हो गयी बद्जबां तेरे जाने से

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